तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने संस्कृत को ‘मृत भाषा’ बताया
तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने हाल ही में दिए एक बयान में संस्कृत को “मृत भाषा” करार दिया, जिसके बाद राजनीतिक और सांस्कृतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। उनका यह बयान भाषाई पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं पर जारी राष्ट्रीय विमर्श के बीच एक नया विवाद खड़ा कर रहा है।
उदयनिधि ने कहा कि संस्कृत एक ऐसी भाषा है, जिसका आज सामाजिक और व्यावहारिक उपयोग बेहद सीमित रह गया है। उनके अनुसार, तमिल जैसी प्राचीन और समृद्ध भाषा जीवंत परंपराओं और संस्कृति का आधार है, जबकि संस्कृत अब केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित हो चुकी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारतीय भाषाओं की विविधता को सम्मान देना जरूरी है और किसी एक भाषा को थोपना उचित नहीं।
बयान के तुरंत बाद कई संस्कृत विद्वानों, विपक्षी नेताओं और सांस्कृतिक संगठनों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनका कहना है कि संस्कृत न केवल साहित्य, दर्शन और विज्ञान की महत्वपूर्ण धरोहर है, बल्कि यह आज भी विभिन्न क्षेत्रों में अध्ययन, शोध और आध्यात्मिक गतिविधियों में प्रासंगिक है। कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि द्रमुक सरकार जानबूझकर भाषाई विवाद को बढ़ावा देती है।
द्रमुक कार्यकर्ताओं ने उदयनिधि के बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी भाषा का अपमान करना नहीं, बल्कि यह बताना है कि आधुनिक भारत में क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता बढ़ गई है।
इस विवाद ने एक बार फिर भारत में भाषा और संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर गर्मागर्म चर्चाओं को जन्म दे दिया है, जिसमें इतिहास, पहचान और आधुनिक जरूरतों के बीच संतुलन की बहस तेज हो गई है।