ट्रम्प टैरिफ से 0.50% कम हो सकती है GDP ग्रोथ
नई दिल्ली, । 08 सितम्बर 2025 । अमेरिका की राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालने वाली ट्रम्प की टैरिफ नीति एक बार फिर चर्चा में है। यदि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की संभावित वापसी के बाद नए आयात शुल्क लागू होते हैं, तो इससे अमेरिकी और वैश्विक दोनों अर्थव्यवस्थाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन टैरिफ का सीधा प्रभाव अमेरिका की GDP ग्रोथ में 0.50% की कमी के रूप में दिखाई दे सकता है।
क्या है ट्रम्प टैरिफ नीति?
डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कार्यकाल के दौरान “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत विदेशी आयात पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने शुरू किए थे।
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चीन से आयातित सामानों पर 25% तक शुल्क लगाया गया।
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यूरोप और अन्य देशों से आने वाले इस्पात और एल्युमिनियम पर भी टैरिफ लगाए गए।
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उद्देश्य: घरेलू उद्योग को सुरक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाना।
उनकी वापसी की संभावना के साथ ही यह चर्चा तेज़ हो गई है कि ट्रम्प टैरिफ दोबारा लागू किए गए तो इसके गंभीर आर्थिक परिणाम हो सकते हैं।
टैक्स सुधार से GDP में 0.2%-0.3% की बढ़ोतरी होगी
- अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% की ग्रोथ रही है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 के लिए अर्थव्यवस्था 6.3%-6.8% से बढ़ेगी।
- हाल ही में खपत और डायरेक्ट टैक्स में कटौती, साथ ही आठ साल के निचले स्तर पर महंगाई, अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत सपोर्ट हैं। ये कदम डिस्पोजेबल इनकम और खर्च को बढ़ाएंगे।
- पिछले हफ्ते जरूरत की चीजों पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) में कमी से मांग बढ़ाने की कोशिश की गई है। अनुमान है कि इस टैक्स सुधार से GDP में 0.2%-0.3% की बढ़ोतरी होगी।
- भारत इस साल 4.4% के फिस्कल डेफिसिट के टारगेट को हासिल कर लेगा। रिजर्व बैंक से मिला पे-आउट और एसेट बिक्री से रेवेन्यू की कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी।
50% टैरिफ से टेक्सटाइल और ज्वेलरी सेक्टर को सबसे ज्यादा नुकसान
भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों पर 27 अगस्त से 50% टैरिफ लागू हो गया है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया टैरिफ भारत के लगभग ₹5.4 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट को प्रभावित कर सकता है।
50% टैरिफ से अमेरिका में बिकने वाले कपड़े, जेम्स-ज्वेलरी, फर्नीचर, सी फूड जैसे भारतीय प्रोडक्ट्स महंगे हो जाएंगे। इससे इनकी मांग में 70% की कमी आ सकती है।
चीन, वियतनाम और मेक्सिको जैसे कम टैरिफ वाले देश इन सामानों को सस्ते दाम पर बेचेंगे। इससे भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी कम होगी।