‘टाइगर अभी ज़िंदा है’: पटना में पोस्टर से गरमाई बिहार की सियासत

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पटना की सड़कों पर अचानक उभरे ‘टाइगर अभी ज़िंदा है’ पोस्टर ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। पोस्टर में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की तस्वीर के साथ यह संदेश लिखा गया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हल्की सी चिंगारी को बड़े विवाद में बदल दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्टर न केवल प्रतीकात्मक संदेश है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। पोस्टर में “टाइगर” शब्द का इस्तेमाल आरजेडी की उस पुरानी राजनीतिक पहचान को दोहराने के रूप में देखा जा रहा है, जिसने कभी बिहार की सियासत में लालू यादव को एक जननेता के रूप में स्थापित किया था।

वहीं, जेडीयू और बीजेपी नेताओं ने इस पोस्टर को “पुराने दौर की राजनीति की वापसी” बताते हुए निशाना साधा है। सत्तारूढ़ दलों के प्रवक्ताओं का कहना है कि बिहार की जनता अब “पोस्टर राजनीति” से आगे बढ़ चुकी है और विकास, शिक्षा, व रोजगार जैसे मुद्दों पर बात करना चाहती है।

पोस्टर लगने के बाद से आरजेडी कार्यालय के बाहर समर्थकों की भीड़ देखी गई, जो इसे “लालू युग की वापसी” का संकेत मान रही है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इसे केवल “राजनीतिक नाटकीयता” बताया है।

पटना नगर निगम ने भी शहर में बिना अनुमति लगाए गए इन पोस्टरों पर कार्रवाई शुरू की है। हालांकि, जिस तेजी से यह पोस्टर चर्चा का विषय बने हैं, वह यह साफ दिखाता है कि बिहार की राजनीति में अभी भी प्रतीक और नारों की शक्ति उतनी ही प्रभावशाली है — और शायद यही कारण है कि “टाइगर अभी ज़िंदा है” आज बिहार की सियासी बहस का नया नारा बन गया है।

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