रोटी को तरसे, घाटों पर गाने भी गए — पुलिस ने आतंकी समझकर पीटा, मनोज तिवारी ने संघर्ष से बनाई पहचान”
नई दिल्ली,। 27 जून 25। अभाव के पलों से मुकाम तक पुल कैसे बनाया जाता है, मनोज तिवारी इसका बेहतरीन उदाहरण हैं। कभी भूख मिटाने के लिए उनको भरपेट रोटी भी नसीब नहीं थी। स्कूल जाने के लिए कई-कई किलोमीटर पैदल चले। नाम बनाने की कोशिश में कभी…
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