चुनाव से पहले नीतीश सरकार की बड़ी सौगात: बिहार में 1 अगस्त से 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त
पटना, 17 जुलाई 2025 — बिहार में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यवासियों को एक बड़ी राहत भरी सौगात दी है। उनकी सरकार ने घोषणा की है कि 1 अगस्त 2025 से हर घरेलू उपभोक्ता को हर महीने 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जाएगी। यह फैसला न केवल आम आदमी के जेब पर राहत देगा, बल्कि राज्य की राजनीति में भी एक अहम मोड़ बन सकता है।
क्या है योजना का मुख्य स्वरूप?
नीतीश सरकार की नई बिजली योजना के तहत:
हर घरेलू उपभोक्ता को हर महीने 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाएगी।
जिन उपभोक्ताओं की मासिक खपत 125 यूनिट से कम होगी, उन्हें बिल नहीं भरना पड़ेगा।
जिनकी खपत इससे ज्यादा होगी, उन्हें केवल अतिरिक्त यूनिट का ही भुगतान करना होगा।
योजना का लाभ सभी शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं को मिलेगा, बशर्ते वे वैध कनेक्शनधारी हों।
क्यों लिया गया यह फैसला?
यह निर्णय चुनावी साल में आया है, जब नीतीश कुमार की लोकप्रियता पर कई चुनौतियाँ हैं। लगातार विपक्ष के हमलों, युवाओं में बढ़ती नाराजगी और महंगाई के मुद्दे ने सत्तारूढ़ सरकार की छवि को प्रभावित किया है। ऐसे में यह योजना जनता के विश्वास को दोबारा जीतने का प्रयास मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पर कहा:
“हमारी सरकार गरीबों और आम आदमी की सरकार है। बिजली अब जीवन की मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है। हम चाहते हैं कि बिहार के हर नागरिक को यह सुविधा बिना बोझ के मिले।”
अनुमानित लाभार्थी और खर्च
राज्य में लगभग 2.3 करोड़ घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से 80% से अधिक की मासिक खपत 125 यूनिट से कम है।
इसका मतलब है कि लगभग 1.8 करोड़ परिवारों को सीधे इस योजना का लाभ मिलेगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना पर सरकार को वार्षिक रूप से ₹4,500–₹5,000 करोड़ का खर्च आ सकता है।
क्या है राजनीतिक असर?
इस योजना का ऐलान ऐसे समय में हुआ है जब बिहार में राजनीतिक तापमान चरम पर है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों नीतीश सरकार पर हमलावर हैं। लेकिन मुफ्त बिजली की यह घोषणा विपक्ष के लिए चिंता का कारण बन सकती है क्योंकि यह सीधे मतदाताओं को प्रभावित करने वाला फैसला है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना:
ग्रामीण मतदाताओं को आकर्षित कर सकती है, जहाँ बिजली बिल एक बड़ा मुद्दा है।
मध्यम वर्ग और शहरी गरीब तबकों के बीच सरकार की लोकप्रियता बढ़ा सकती है।
विपक्षी दलों को रक्षात्मक मोड में डाल सकती है, खासकर अगर वे इसे “चुनावी लॉलीपॉप” करार देते हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
राजद ने इस योजना को “चुनावी हथकंडा” बताते हुए कहा है कि:
“अगर सरकार को वास्तव में जनता की चिंता होती तो यह योजना पिछले साल ही लागू कर दी जाती। चुनाव पास आ गया तो मुफ्त बिजली की याद आई।”
वहीं, भाजपा ने इसे “जनता की मेहनत की कमाई से खरीदी गई लोकप्रियता” बताया और योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए।
निष्कर्ष: राहत या राजनीति?
बिहार में मुफ्त बिजली की योजना को जनता एक बड़ी राहत के रूप में देख सकती है, खासकर उन घरों में जहाँ सीमित संसाधनों में बजट संभालना एक चुनौती होता है। हालांकि, इस फैसले की राजनीतिक टाइमिंग यह संकेत जरूर देती है कि इसका उद्देश्य चुनावी गणित को भी प्रभावित करना है।
अब देखना होगा कि यह योजना जमीन पर कितनी प्रभावी ढंग से उतरती है और क्या यह नीतीश सरकार के लिए चुनाव में ‘पावरफुल’ हथियार साबित हो सकती है या नहीं। एक बात तो तय है — बिहार की राजनीति में बिजली फिर से चुनावी करंट बन गई है।