शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह चालू वित्तीय वर्ष में 4% घटकर ₹6.64 लाख करोड़, आंकड़े जारी
केंद्र सरकार के लिए राजस्व के प्रमुख स्रोतों में से एक, प्रत्यक्ष कर संग्रह, चालू वित्तीय वर्ष में गिरावट दर्ज कर रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 4% घटकर ₹6.64 लाख करोड़ पर आ गया है। यह कमी राजकोषीय प्रबंधन और विकास योजनाओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
प्रत्यक्ष करों में मुख्य रूप से आयकर और कॉरपोरेट कर शामिल होते हैं। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में इस बार कम संग्रह का कारण आर्थिक गतिविधियों में मंदी, कॉरपोरेट मुनाफों में कमी और कुछ सेक्टरों में निवेश की धीमी गति को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और घरेलू मांग में सुस्ती का असर टैक्स संग्रह पर पड़ा है।
सरकार के लिए यह गिरावट चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वित्तीय वर्ष के अंत तक निर्धारित राजस्व लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब आने वाले महीनों में टैक्स संग्रह की रफ्तार तेज करनी होगी। आमतौर पर अक्टूबर से मार्च के बीच, कंपनियों के एडवांस टैक्स और व्यक्तिगत आयकर की अंतिम किस्तों के कारण संग्रह में तेजी आती है।
वित्त मंत्रालय ने हालांकि उम्मीद जताई है कि आने वाले महीनों में स्थिति में सुधार होगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “त्योहारों के मौसम और वर्ष के अंतिम तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है, जिससे कर संग्रह में बढ़ोतरी हो सकती है।”
विश्लेषकों का मानना है कि प्रत्यक्ष कर संग्रह में गिरावट का असर सरकार की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक क्षेत्र के निवेश पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को या तो उधारी बढ़ानी होगी या अन्य राजस्व स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ेगा।
कुल मिलाकर, ₹6.64 लाख करोड़ का आंकड़ा इस बात का संकेत है कि कर संग्रह के मोर्चे पर इस साल सरकार को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी। आगे का रुझान त्योहारी सीजन और कॉरपोरेट नतीजों पर काफी हद तक निर्भर करेगा।