सेना को राजनीति में मत घसीटो
भारतीय लोकतंत्र की नींव मजबूत संस्थानों पर टिकी है, जिनमें से एक है हमारी सेना। भारतीय सेना न सिर्फ देश की सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि आपदा के समय आम नागरिकों की सहायता भी करती है। ऐसे में सेना को राजनीति में घसीटना न केवल अनुचित है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी हानिकारक माना जाता है।
हाल के समय में कई राजनीतिक मंचों से नेताओं द्वारा सेना के पराक्रम को वोट बैंक की राजनीति से जोड़ने की कोशिश देखने को मिली है। यह प्रवृत्ति चिंताजनक है क्योंकि सेना की पहचान किसी भी राजनीतिक विचारधारा से परे रहनी चाहिए। सैन्य बलों की पेशेवर छवि और उनके बलिदान का सम्मान करना हर नागरिक और राजनेता की जिम्मेदारी है।
भारत की सेना हमेशा संविधान के दायरे में रहकर काम करती है, और उसे राजनीतिक मतभेदों का हिस्सा बनाना देश की अखंडता के लिए खतरा साबित हो सकता है। यह आवश्यक है कि सभी राजनीतिक दल सेना का उल्लेख सम्मानपूर्वक करें और उसे अपने भाषणों में राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने से बचें।
देशहित में यह संदेश स्पष्ट होना चाहिए: सेना का सम्मान उसके अनुशासन और समर्पण के लिए है, न कि राजनीतिक लाभ के लिए। लोकतंत्र की सच्ची मर्यादा तभी बरकरार रह सकती है जब सेना को राजनीति से दूर रखा जाए।