आरएसएस पर प्रतिबंध की मांग अनुचित, समाज ने संघ को स्वीकार किया है: दत्तात्रेय होसबले
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने संघ पर प्रतिबंध लगाने की मांग को पूरी तरह अनुचित करार दिया है। उनका कहना है कि भारतीय समाज ने आरएसएस को न केवल स्वीकार किया है, बल्कि उसे देश के सबसे बड़े सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों में शुमार किया है। यह टिप्पणी उन राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के संदर्भ में आई है, जो अक्सर आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाते रहे हैं।
दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि आरएसएस ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संघ का चरित्र सदैव राष्ट्रहित और समाज सेवा पर केंद्रित रहा है, और लाखों स्वयंसेवक विभिन्न क्षेत्रों में सेवा कार्यों के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन को केवल वैचारिक मतभेदों के चलते प्रतिबंधित करने की मांग लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आरएसएस की लोकप्रियता और प्रभाव समाज के हर वर्ग में बढ़ रहा है, और यह स्वयं इस बात का प्रमाण है कि जनता ने संघ के कार्यों को सराहा है। उन्होंने विरोधियों से अपील की कि संगठन के विचारों और कार्यों को समझने के लिए संवाद का रास्ता अपनाएं, न कि प्रतिबंध की मांग का।