क्रिश्चियन अधिकारी की बर्खास्तगी पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर
क्रिश्चियन अधिकारी की सेवा समाप्ति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए एक क्रिश्चियन अधिकारी की बर्खास्तगी को सही ठहराया है। मामले में यह आरोप था कि अधिकारी ने सेवा नियमों और आचार संहिता का उल्लंघन किया था। संबंधित विभाग द्वारा की गई विभागीय जांच में आरोप सिद्ध पाए जाने के बाद अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त किया गया था।
अधिकारी ने अपनी बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका दावा था कि कार्रवाई पक्षपातपूर्ण थी और बिना उचित प्रक्रिया पूरी किए की गई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच नियमित, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप थी।
शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में रहते हुए कोई भी अधिकारी आचार संहिता के उल्लंघन, कर्तव्यहीनता या अनुशासनहीनता का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ की गई कार्यवाही न्यायोचित मानी जाएगी। अदालत ने कहा कि सबूतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग द्वारा लिया गया निर्णय उचित है और हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।
इस फैसले को सरकारी सेवा में अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।