बिहार चुनाव 2025: दूसरे चरण का तूफानी प्रचार थमा, अब मतदाताओं की बारी
दूसरे चरण का प्रचार थमा, सन्नाटा और सस्पेंस बढ़ा
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण के लिए चुनाव प्रचार का शोर अब थम गया है। तमाम दलों के दिग्गज नेताओं ने अंतिम दौर में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। अब मैदान में हैं सिर्फ मतदाता — जो तय करेंगे सत्ता का समीकरण और भविष्य का नेतृत्व।
बड़े नेताओं की मैराथन रैलियां
दूसरे चरण में 94 विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग होनी है। एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों ने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव, राहुल गांधी, और प्रियंका गांधी सहित सभी प्रमुख नेताओं ने कई रैलियों में मतदाताओं से सीधा संवाद किया।
जहाँ एनडीए ने विकास, कानून-व्यवस्था और रोजगार सृजन को मुख्य मुद्दा बनाया, वहीं इंडिया गठबंधन ने महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की स्थिति पर सरकार को घेरा।
प्रचार में मुद्दों की गर्मी
दूसरे चरण के प्रचार में जातीय समीकरण, स्थानीय विकास और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे छाए रहे। विभिन्न क्षेत्रों में सत्तारूढ़ दलों के खिलाफ स्थानीय असंतोष को विपक्ष ने भुनाने की कोशिश की, जबकि एनडीए ने “विकसित बिहार, सशक्त भारत” के नारे के साथ वोट मांगें।
सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी
चुनाव आयोग ने दूसरे चरण की वोटिंग को लेकर सभी जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं। अर्धसैनिक बलों की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी, और संवेदनशील बूथों पर विशेष प्रबंध किए गए हैं। मतदाताओं को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान का भरोसा दिलाया गया है।
मतदाताओं की भूमिका निर्णायक
अब चुनावी मंचों का शोर थमने के बाद निगाहें मतदाताओं पर टिक गई हैं। बिहार का यह चरण सत्ता की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है क्योंकि इसमें वे क्षेत्र शामिल हैं जो पारंपरिक रूप से सत्ता परिवर्तन के संकेत देते रहे हैं।
दूसरे चरण के प्रचार के समाप्त होते ही राजनीतिक दल अब अपने-अपने समीकरणों के मूल्यांकन में जुट गए हैं, जबकि जनता 12 नवंबर को अपने मताधिकार के प्रयोग से बिहार के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेगी।