असम में मोहन भागवत का युवाओं को संदेश—भारत पर गर्व करें और कुटुंब प्रबोधन को अपनाएं

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असम में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने युवाओं को संबोधित करते हुए भारत की महान सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और कुटुंब प्रबोधन की परंपरा को जीवन में अपनाने का आग्रह किया। उनका यह संबोधन युवाओं में राष्ट्रभावना और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने पर केंद्रित रहा।

भागवत ने कहा कि भारत केवल भौगोलिक सीमाओं का नाम नहीं, बल्कि एक गहरा सांस्कृतिक संदेश है, जिसे पीढ़ियों से आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें अपने देश की विविधता, परंपराओं और आध्यात्मिक धरोहर पर गर्व होना चाहिए, क्योंकि यही भारत की असली पहचान है। उन्होंने यह भी बताया कि जब युवा अपने मूल्यों को समझते हैं, तभी वे समाज और राष्ट्र के सशक्त निर्माता बनते हैं।

कुटुंब प्रबोधन पर जोर देते हुए भागवत ने कहा कि परिवार भारतीय समाज की सबसे मजबूत इकाई है। परिवार में संस्कार, अनुशासन, परस्पर सम्मान और सामूहिकता का भाव विकसित होता है, जो जीवन को संतुलित और सफल बनाता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि आधुनिक जीवनशैली अपनाने के बावजूद वे अपने परिवार और मूल संस्कृति से जुड़े रहें।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा, स्थानीय प्रतिनिधि और आरएसएस कार्यकर्ता शामिल हुए। भागवत के संबोधन को युवाओं ने प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि यह सोच और दृष्टिकोण समाज को सकारात्मक दिशा में ले जा सकता है।

डॉ. मोहन भागवत का यह संदेश न केवल युवाओं के लिए मार्गदर्शन है, बल्कि देश की सांस्कृतिक एकता और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है।

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