“कोड नेम उक़ासा” — तुर्किये से रची गई भारत पर आतंकी साज़िश का खुलासा
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए “कोड नेम उक़ासा” नामक आतंकी साज़िश का पर्दाफाश किया है, जिसके तार तुर्किये तक जुड़ते पाए गए। जांच में सामने आया है कि विदेशी नेटवर्क भारत के भीतर अस्थिरता फैलाने, आतंकी मॉड्यूल सक्रिय करने और डिजिटल प्रचार के माध्यम से कट्टरपंथ को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रहा था।
यह ऑपरेशन बेहद गोपनीय तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिसमें भारतीय युवाओं को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से निशाना बनाकर उन्हें उकसाने, ट्रेनिंग देने और फंडिंग उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही थी। खुफिया इनपुट के अनुसार, “उक़ासा” नामक कोड इसी भर्ती और indoctrination अभियान के लिए उपयोग किया जा रहा था।
एजेंसियों की जांच से पता चला है कि इस नेटवर्क में कुछ ऐसे संचालक शामिल थे जो तुर्किये के सुरक्षित ठिकानों से काम कर रहे थे और भारत में अपने सहयोगियों के जरिए जमीन पर गतिविधियों को आगे बढ़ा रहे थे। इसके लिए एन्क्रिप्टेड ऐप्स, क्रिप्टो भुगतान और फर्जी डिजिटल पहचान का इस्तेमाल किया जा रहा था।
भारत की एजेंसियों ने समय रहते इस नेटवर्क की गतिविधियों को ट्रैक कर कई महत्वपूर्ण डिजिटल ट्रेल, संदिग्ध बैंक लेन-देन और विदेश से संचालित संचार चैनलों को पकड़ लिया। जांच दल का कहना है कि यह साज़िश भारत में आतंकी मॉड्यूल को पुनर्जीवित करने और संवेदनशील राज्यों में नफरत फैलाने के उद्देश्य से रची गई थी।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तुर्किये समेत कुछ क्षेत्रों में सक्रिय कट्टरपंथी समूह अब इंटरनेट आधारित indoctrination मॉडल अपना रहे हैं, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन चुका है। भारत ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और साइबर निगरानी को और मजबूत करने के संकेत दिए हैं।
“कोड नेम उक़ासा” का खुलासा एक बार फिर दिखाता है कि आधुनिक आतंकवाद अब भौतिक सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में नई रणनीतियों के साथ विकसित हो रहा है — और इसके खिलाफ सजगता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।