विवाद के बाद आज टाटा ट्रस्ट की बोर्ड मीटिंग

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नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2025 । टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) के भीतर हाल ही में उत्पन्न बोर्डरूम विवाद ने आज की बैठक को विशेष महत्व दे दिया है। इस बैठक को यह उम्मीद है कि ट्रस्ट की लड़खड़ाती स्थिरता को बहाल किया जाएगा और आयी फूट को सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।

रतन टाटा की डेथ एनिवर्सरी के एक बाद आज यानी 10 अक्टूबर को टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टियों की बैठक होगी। ट्रस्ट में चल रहे विवाद पर सरकार के दखल के बाद ये पहली बोर्ड मीटिंग है।

हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बैठक में गवर्नेंस या बोर्ड की लीडरशिप से जुड़े किसी भी विवादित मुद्दे पर चर्चा की संभावना कम है।

मीटिंग में हेल्थकेयर प्रोजेक्ट्स से जुड़े फंड्स को मंजूरी दी जा सकती है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार के सीधे दखल के बाद बैठक का माहौल शांत रहेगा।

7 अक्टूबर को अमित शाह के घर हो चुकी मीटिंग

टाटा संस की बोर्ड सीट को लेकर हुए विवाद के बीच 7 अक्टूबर को सीनियर लीडरशिप ने गृहमंत्री अमित शाह के घर पर 45 मिनट तक मीटिंग की थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कहा कि घरेलू झगड़े को जल्द निपटा लिया जाए, ताकि कंपनी पर असर न हो।

मीटिंग में गृहमंत्री शाह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के साथ टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा शामिल हुए। अभी टाटा संस के बोर्ड में 4 सीटें खाली हैं।

बोर्ड में नटराजन चंद्रशेखरन, नोएल एन टाटा, वेणु श्रीनिवासन, हरीश मैनवानी और सौरभ अग्रवाल शामिल हैं। टाटा संस की मार्च 2024 तक मार्केट वैल्यू ₹27.85 लाख करोड़ थी। पूरे ग्रुप की वैल्यू करीब ₹15.9 लाख करोड़ है।

5 पॉइंट में समझें टाटा ग्रुप का पूरा विवाद

  • ये पूरा झगड़ा टाटा ट्रस्ट्स की 11 सितंबर को हुई मीटिंग से शुरू हुआ। इसमें टाटा संस के बोर्ड पर पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह को नॉमिनी डायरेक्टर के तौर पर दोबारा अपॉइंट करने पर बात होनी थी। लेकिन मीटिंग में सिंह नहीं आए। टाटा ट्रस्ट्स के सिंह समेत कुल सात ट्रस्टी हैं।
  • टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा के 9 अक्टूबर 2024 को निधन के बाद ट्रस्ट्स ने फैसला लिया था कि टाटा संस बोर्ड पर नॉमिनी डायरेक्टर्स को 75 साल की उम्र के बाद हर साल दोबारा अपॉइंट करना पड़ेगा। 77 साल के सिंह 2012 से ये रोल निभा रहे थे।
  • री-अपॉइंटमेंट का ये रेजोल्यूशन नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ने रखा था। लेकिन बाकी चार लोग- मेहली मिस्त्री, प्रामित झावेरी, जहांगीर एचसी जहांगीर और डेरियस खंबाटा ने साफ मना कर दिया। चूंकि ये चारों मेजॉरिटी में थे तो रेजोल्यूशन रद्द हो गया।
  • इसके बाद इन ट्रस्टीज ने मेहली मिस्त्री को ही टाटा संस बोर्ड पर नॉमिनी के तौर पर प्रपोज करने की कोशिश की। लेकिन नोएल टाटा और श्रीनिवासन ने रोक दिया। मीटिंग खत्म होते ही सिंह ने टाटा संस बोर्ड से खुद ही इस्तीफा दे दिया।
  • मेहली मिस्त्री के नेतृत्व वाले चार ट्रस्टी शापूरजी पलोनजी फैमिली से जुड़े हैं। इस फैमिली की टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है। पीटीआई के मुताबिक, मेहली ने महत्वपूर्ण फैसलों से बाहर रखे जाने पर नाराजगी जताई है। झगड़े का केंद्र टाटा संस में डायरेक्टरशिप के पद हैं।

टाटा संस में 4-6% हिस्सेदारी बेच सकता है SP ग्रुप

उधर, टाटा और शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप के बीच सुलह का रास्ता भी साफ होता नजर आ रहा है। हाल की घटनाओं से वाकिफ हाई-लेवल सोर्सेज बता रहे हैं कि टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस SP ग्रुप को टाटा संस में 4-6% स्टेक डाइल्यूशन ऑफर करने को तैयार हैं।

अगर ये डील पक्की हो गई, तो SP ग्रुप को कर्ज चुकाने के लिए पैसे मिल लजाएंगे। ये ग्रुप अभी करीब 30,000 करोड़ रुपए के कर्ज में है।

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