वांगचुक अरेस्ट केस- SC में 14 अक्टूबर तक सुनवाई टली
नई दिल्ली, 06 अक्टूबर 2025 । सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में वांगचुक अरेस्ट केस की अगली सुनवाई को 14 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया है। यह मामला लंबे समय से सुर्खियों में है और इसमें कई संवेदनशील कानूनी और राजनीतिक पहलू जुड़े हुए हैं। वांगचुक को कथित तौर पर कुछ घटनाओं के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था, और उनकी सुरक्षा, गिरफ्तारी की वैधता और कानूनी अधिकारों को लेकर कोर्ट में याचिकाएँ दायर की गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को जोधपुर जेल में बंद सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से जुड़ी हेबियस कार्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) की याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका पर जवाब मांगा है।
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की याचिका में पति की NSA के तहत गिरफ्तारी को चुनौती दी गई थी। साथ ही उनकी तत्काल रिहाई की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई 14 अक्टूबर तक टल गई है।
कोर्ट में वांगचुक के वकील कपिल सिब्बल ने दलील में कहा- सोनम वांगचुक को जिन कारणों से हिरासत में लिया गया, उसकी कॉपी परिवार को नहीं सौंपी गई है।
इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- हिरासत के कारण हिरासत में लिए गए व्यक्ति (वांगचुक) को पहले ही दिए जा चुके हैं। इसकी कॉपी वांगचुक की पत्नी को देने पर विचार किया जाएगा।
दरअसल, 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा भड़काने के आरोप में 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत 26 वांगचुक को पुलिस ने हिरासत में लिया गया था। तब से वे जोधपुर जेल में हैं।
अब जानिए क्या होती है हैबियस कार्पस ?
हैबियस कार्पस लैटिन भाषा का शब्द है, इसका मतलब होता है- शरीर सामने लाओ। यानी किसी व्यक्ति को गैर-कानूनी ढंग से गिरफ्तार किया है, हिरासत में रखा है, तो अदालत उस व्यक्ति को तुरंत कोर्ट के सामने पेश करने का आदेश दे सकती है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत यह अधिकार हर नागरिक को मिला है। कोई भी व्यक्ति, उसका परिवार/दोस्त हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हैबियस कॉर्पस रिट दायर कर सकता है। आदेश के बाद पुलिस को पूरी जानकारी कोर्ट के सामने रखनी होती है।