बीएसएफ का पहला ड्रोन कमांडो बैच तैयार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू हुई खास ट्रेनिंग
22 सितंबर भारत की सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बीएसएफ का पहला ड्रोन कमांडो बैच अब पूरी तरह से तैयार हो गया है। इन कमांडो ने हाल ही में ड्रोन वॉरफेयर स्कूल में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है। यह पहल ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू की गई थी, ताकि सीमा पार से होने वाली नई चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
बीएसएफ अधिकारियों के अनुसार, इन कमांडो को अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल, निगरानी मिशन, बार्डर क्षेत्रों में घुसपैठ रोकने और हथियारों व नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी गतिविधियों पर नज़र रखने की ट्रेनिंग दी गई है। इसके साथ ही उन्हें दुश्मन ड्रोन को पहचानने और निष्क्रिय करने की रणनीति भी सिखाई गई है।
ड्रोन वॉरफेयर स्कूल में दी गई इस ट्रेनिंग में न केवल तकनीकी कौशल पर ध्यान दिया गया, बल्कि वास्तविक ऑपरेशनल परिस्थितियों की नकल कराकर कमांडो को तैयार किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ड्रोन तकनीक आधुनिक युद्ध और सीमा प्रबंधन में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
बीएसएफ का यह कदम पाकिस्तान और अन्य दुश्मन ताकतों की साजिशों को नाकाम करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिन तकनीकी चुनौतियों का सामना हुआ था, उनके आधार पर ही यह नया कार्यक्रम शुरू किया गया।
इस पहले बैच की सफलता के बाद बीएसएफ अब भविष्य में और भी कमांडो तैयार करने की योजना बना रही है, ताकि हर सेक्टर में ड्रोन निगरानी और सुरक्षा का दायरा बढ़ाया जा सके। यह कदम भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।