अमेरिका के लिए पोस्टल सर्विस अब पूरी तरह से सस्पेंड
नई दिल्ली,01 सितंबर, भारत और अमेरिका के बीच डाक सेवा (Postal Service) को लेकर एक बड़ा निर्णय सामने आया है। भारतीय डाक विभाग ने घोषणा की है कि अमेरिका के लिए सभी प्रकार की पोस्टल सेवाएं अब पूरी तरह से निलंबित (Suspended) कर दी गई हैं। इस कदम से उन लाखों भारतीय परिवारों, छात्रों और व्यवसायियों को सीधा असर पड़ेगा जो पत्राचार, दस्तावेज़, पार्सल और व्यापारिक सामग्री अमेरिका भेजने के लिए डाक सेवा पर निर्भर रहते थे।
भारतीय डाक विभाग ने अमेरिका के लिए सभी तरह की पोस्टल सर्विस पर टेम्परेरी तौर पर रोक लगा दी है। ये फैसला अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ के बाद कस्टम विभाग के नए नियमों में अस्पष्टता के चलते किया गया है।
इसमें 100 डॉलर तक के लेटर, दस्तावेज और गिफ्ट आइटम्स भी शामिल हैं। इससे पहले डाक विभाग ने 25 अगस्त से इन कैटेगरी को छोड़कर सभी पार्सल पर रोक लगा दी थी ।
विभाग ने रविवार को कहा कि जब तक स्थिति साफ नहीं होती और एयरलाइंस अमेरिका जाने वाले डाक पार्सल ले जाने को तैयार नहीं होतीं, तब तक यह रोक जारी रहेगी।
डाक विभाग ने बताया- जिन्होंने पहले ही बुकिंग कराई है लेकिन सामान भेजा नहीं जा सका, वे पोस्टेज का रिफंड ले सकते हैं। हम हालात पर नजर रखे हुए है और जल्द से जल्द सेवा बहाल करने की कोशिश की जा रही है।
पहले 70 हजार रुपए तक के सामान ड्यूटी फ्री थे
एक्सट्रा टैरिफ लागू होने के बाद 29 अगस्त से अमेरिका जाने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय डाक सामानों पर देश-विशेष इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) टैरिफ स्ट्रक्चर के अनुसार कस्टम ड्यूटी देनी पड़ रही है। चाहे उनकी कीमत कितनी भी हो।
हालांकि, अभी भी 100 डॉलर (करीब 8,700 रुपए) तक की कीमत वाले लेटर, डॉक्यूमेंट और गिफ्ट आइटम्स को ड्यूटी से छूट मिलती रहेगी, लेकिन नियम इसके लिए भी स्पष्ट नहीं है। इसके चलते एयरलाइंस इन्हें भी नहीं ले जा रही है। वहीं, 29 अगस्त से पहले 800 डॉलर यानी करीब 70 हजार रुपए तक के सामान ड्यूटी फ्री थे।
निलंबन का कारण
डाक विभाग ने स्पष्ट रूप से यह जानकारी नहीं दी है कि यह निलंबन क्यों लागू किया गया है, लेकिन इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण माने जा रहे हैं –
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एयरलाइंस की सीमित उड़ानें और लॉजिस्टिक समस्या – अमेरिका जाने वाले पार्सल और पत्र लंबे समय से देरी का शिकार हो रहे थे।
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उच्च लागत और वितरण समय में दिक्कतें – ट्रांसपोर्टेशन खर्च और समय सीमा पूरा करना कठिन हो गया था।
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सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समझौते – कई बार सुरक्षा कारणों या द्विपक्षीय समझौतों में बदलाव के चलते भी ऐसी सेवाएं रोकी जाती हैं।
किस पर होगा सबसे ज्यादा असर?
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विदेश पढ़ने वाले छात्र – भारतीय परिवारों से मिलने वाले पत्र और दस्तावेज़ अब नहीं पहुंच पाएंगे।
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व्यापारी और ई-कॉमर्स – छोटे व्यवसायी जो अमेरिका में अपने ग्राहक को पार्सल भेजते थे, उन्हें सबसे बड़ी समस्या होगी।
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NRI परिवार – अमेरिका में बसे भारतीयों को भारत से दवाइयाँ, दस्तावेज़ और सांस्कृतिक सामग्री भेजना कठिन होगा।
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सामान्य जनता – सामान्य पत्राचार और शुभकामनाएं भेजना भी असंभव हो जाएगा।
विकल्प क्या हैं?
हालांकि पोस्टल सर्विस बंद होने से बड़ी असुविधा होगी, लेकिन अभी भी कुछ विकल्प उपलब्ध हैं –
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निजी कूरियर कंपनियां जैसे DHL, FedEx, UPS अंतरराष्ट्रीय सेवाएं जारी रखे हुए हैं।
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हालांकि इनकी लागत डाक विभाग की तुलना में बहुत अधिक होती है।
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कई मामलों में छात्र और व्यापारी मजबूरी में इन्हीं सेवाओं का इस्तेमाल करेंगे।
भारत-अमेरिका संबंधों पर असर
डाक सेवा का सस्पेंड होना केवल सुविधा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत-अमेरिका संबंधों पर भी सवाल उठाता है। दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा और परिवारिक रिश्तों की गहरी कड़ी है। ऐसे में एक बुनियादी सेवा का निलंबन निश्चित तौर पर लोगों के बीच नाराज़गी और असंतोष पैदा करेगा।
अमेरिका के लिए पोस्टल सर्विस का निलंबन भारत के नागरिकों के लिए एक बड़ा झटका है। यह निर्णय आम आदमी, व्यवसायियों और छात्रों सभी के जीवन को प्रभावित करेगा। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक और नीतिगत दिक्कतें दूर की जाएंगी और यह सेवा दोबारा शुरू हो सकेगी।